जब आप सही तरीके से काम कर रहे हों अव्यवस्था या गलती की गुंजाइश न के बराबर हो फिर भी बराबर नकारात्मक वातावरण बनता चला जाये तो ये समझ लेना चाहिए कि
आपके एक नहीं अनेक दुश्मन हैं ! दुश्मन वो ही नहीं होता जो बाहर से घात करे जो दुश्मन घर के भीतर से घात करता है वो ही सबसे ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि घर के दुश्मन को आपकी कमजोरियां आपकी ताकत सभी कुछ अच्छे से पता होता और वो उसी उसी जगह वार करता है जहां कि आप कमजोर होते हैं !
हमारे देश में भी इस समय अराजकता का माहौल बन रहा है J N U नज़र में है इसलिए हमारा ध्यान सिर्फ उसी पर ही है हर आदमी की नज़र J N U पर ही हैं लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि हम खुद के ही घरों में ग़द्दार पैदा कर रहे हों कहीं ऐसा तो नहीं कि ये गद्दार और भी विश्वविद्यालयों में अपनी जडें जमा चुके हों आज इस विषयों पर नज़र जमाना जरूरी हो गया कॉलेज की राजनीति किस तरफ जा रही है या जा चुकी है अब ये देखना जरूरी भी है ।
पहले फ़िल्म उद्दोग की तरफ से नामचीन नायकों का असंतुष्टि से भरे बयान आना एक के बाद एक लगातार फिर यही असंतोष विश्विद्यालयों तक पहुँच जाना इसके अतिरिक्त बड़े बड़े साहित्यकारों द्वारा सम्मान बापसी का भी एक लंबा दौर चलना और फिर इन सभी तरफ से सन्नाटा पसर जाना और एक और नयी बात को जन्म देना ये सब क्या है सिवाय सोची समझी साजिश के इसे और क्या नाम दिया जा सकता है इन बातों को अब गंभीरता के साथ लेने का समय आ गया है ।
इस देश ने करवट बदली है अब ये उठ कर न सिर्फ चलने के लिए बल्कि दौड़ने के लिए तैयार है और जब आप रेस में सबसे आगे होते हैं उस समय सिर्फ अपनी शक्ति ही नहीं अपना मनोबल भी ऊँचा रखना होता है क्योंकि यदि मनोबल ही ऊँचा नहीं होगा फिर शक्ति से काम नहीं चलेगा यहां भी देश के मनोबल पर चोट की जा रही है आज के समय में हमें बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरा घर के दुश्मनों से होता है ये वे दुश्मन होते हैं जिनसे आपकी सफलता नहीं पचती और वे बिना सामने आये आपके चारो तरफ जाल बिछाते हैं किसी भी देश की युवाशक्ति को तोड़ देने का मतलब है उस देश की आधी शक्ति को तोड़ देना ................कहीं ये इसी की आहट तो नहीं !!!!
आपके एक नहीं अनेक दुश्मन हैं ! दुश्मन वो ही नहीं होता जो बाहर से घात करे जो दुश्मन घर के भीतर से घात करता है वो ही सबसे ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि घर के दुश्मन को आपकी कमजोरियां आपकी ताकत सभी कुछ अच्छे से पता होता और वो उसी उसी जगह वार करता है जहां कि आप कमजोर होते हैं !
हमारे देश में भी इस समय अराजकता का माहौल बन रहा है J N U नज़र में है इसलिए हमारा ध्यान सिर्फ उसी पर ही है हर आदमी की नज़र J N U पर ही हैं लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि हम खुद के ही घरों में ग़द्दार पैदा कर रहे हों कहीं ऐसा तो नहीं कि ये गद्दार और भी विश्वविद्यालयों में अपनी जडें जमा चुके हों आज इस विषयों पर नज़र जमाना जरूरी हो गया कॉलेज की राजनीति किस तरफ जा रही है या जा चुकी है अब ये देखना जरूरी भी है ।
पहले फ़िल्म उद्दोग की तरफ से नामचीन नायकों का असंतुष्टि से भरे बयान आना एक के बाद एक लगातार फिर यही असंतोष विश्विद्यालयों तक पहुँच जाना इसके अतिरिक्त बड़े बड़े साहित्यकारों द्वारा सम्मान बापसी का भी एक लंबा दौर चलना और फिर इन सभी तरफ से सन्नाटा पसर जाना और एक और नयी बात को जन्म देना ये सब क्या है सिवाय सोची समझी साजिश के इसे और क्या नाम दिया जा सकता है इन बातों को अब गंभीरता के साथ लेने का समय आ गया है ।
इस देश ने करवट बदली है अब ये उठ कर न सिर्फ चलने के लिए बल्कि दौड़ने के लिए तैयार है और जब आप रेस में सबसे आगे होते हैं उस समय सिर्फ अपनी शक्ति ही नहीं अपना मनोबल भी ऊँचा रखना होता है क्योंकि यदि मनोबल ही ऊँचा नहीं होगा फिर शक्ति से काम नहीं चलेगा यहां भी देश के मनोबल पर चोट की जा रही है आज के समय में हमें बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरा घर के दुश्मनों से होता है ये वे दुश्मन होते हैं जिनसे आपकी सफलता नहीं पचती और वे बिना सामने आये आपके चारो तरफ जाल बिछाते हैं किसी भी देश की युवाशक्ति को तोड़ देने का मतलब है उस देश की आधी शक्ति को तोड़ देना ................कहीं ये इसी की आहट तो नहीं !!!!
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